झारखंड सरकार के छठ महापर्व की गाइडलाइन पर भाजपा ने जताई आपत्ति, तानाशाही फैसला वापस लेने की मांग की।

Jharkhand

जमशेदपुर: छठ महापर्व पर झारखंड सरकार द्वारा गाइडलाइंस जारी होते ही निर्णय का चौतरफा विरोध तेज़ हो गयी है। राज्य सरकार द्वारा तालाब, लेक, डैम, नदी समेत सार्वजनिक घाटों पर छठ मनाने की मनाही संबंधी आदेश जारी किए जाने को भाजपा ने तुगलकी फ़रमान बता कड़ा विरोध जताया है। सोमवार को भाजपा जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष गुंजन यादव ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि हेमंत सरकार लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ कर रही है। राज्य सरकार के ऐसे तानाशाही फरमान सीधे लोगों को छठ पर्व ना मनाने का आदेश दे रही है। सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन में नदी, तालाब, कृत्रिम छठ घाट, छोटे जलाशय जैसे स्थानों पर मनाही के निर्णय बेहद दुखद एवं निंदनीय है। भाजपा ऐसे निर्णयों का कड़ा विरोध करती है, उन्होंने राज्य सरकार से पड़ोसी राज्यों में जारी निर्देशों के अनुरूप झारखंडवासियों को भी कोविड19 के नियमों के साथ महापर्व मनाने का संशोधित आदेश जारी करने की माँग की है। उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण की पोषक झामुमो-काँग्रेस गठबंधन सरकार का दोहरा चाल, चरित्र, चेहरा उजागर हो चुका है।

वहीं, भाजपा महानगर प्रवक्ता प्रेम झा ने जारी निर्देशों पर कठोर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि झारखंड सरकार के महापर्व छठ पर रविवार देर रात आयी दिशानिर्देश सच्चाई से पड़े एवं जनभावनाओं की हत्या के समान है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली आपदा विभाग गाइडलाइंस कम और लोगों की भावनाओं पर आपदा लानें को ज़्यादा आतुर है। ऐसे आपदा प्रबंधन तमाम जनता पर आपदा बन पड़ी है। प्रत्येक पूजा के अंतिम समय पर आपदा प्रबंधन द्वारा बिना किसी संबंधित संगठन से चर्चा किये बंद कमरों में बैठ कर लाल फीताशाही के प्रभाव में दिशानिर्देश जारी करती आ रही है। अब मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन स्वयं बताये की छठ व्रतधारी एवं श्रद्धालु छठ मैया के सामने हाथ जोड़े या शासन-प्रशासन के समक्ष। सरकार को आपदा से बचाव के साथ साथ जनता की आस्था का भी ख्याल रखना, यह उसकी जिम्मेदारी है।

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