सुविधाएं नदारद, टैक्स मेट्रो सिटी जैसी:पांच साल में टैक्स से कमाई 5 गुणा बढ़ी, सुविधाएं शून्य; मच्छर मारने की एक फॉगिंग मशीन भी निगम के पास नहीं - News of States

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सुविधाएं नदारद, टैक्स मेट्रो सिटी जैसी:पांच साल में टैक्स से कमाई 5 गुणा बढ़ी, सुविधाएं शून्य; मच्छर मारने की एक फॉगिंग मशीन भी निगम के पास नहीं

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रांची नगर निगम ने पिछले पांच वर्षों में प्रॉपर्टी टैक्स में ढाई गुणा बढ़ोत्तरी कर अपनी कमाई पांच गुणा बढ़ा ली। वर्ष 2016 से पहले प्रॉपर्टी टैक्स से निगम को सालाना 10 करोड़ रुपए मिलते थे, अब सालाना 50 करोड़ रुपए मिल रहे हैं। कमाई बढ़ने के बावजूद टैक्स देने वालों के लिए कोई सुविधा नहीं बढ़ी। अब एक बार फिर प्रॉपर्टी टैक्स में बढ़ोत्तरी करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए राज्य सरकार नया फॉर्मूला तैयार करने में जुटी है। सर्कल रेट के आधार पर प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने का नियम बन सकता है।

यह लागू हुआ तो शहर में स्थित 2.50 लाख भवन मालिकों पर फिर महंगाई की मार पड़ेगी। लेकिन, शहर की 15 लाख आबादी के लिए आज तक मुलभूत सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विस्तृत योजना नहीं बनी। अधिकारी मेट्रो सिटी की तरह टैक्स बढ़ाते रहे, लेकिन सुविधा में नाममात्र की बढ़ोत्तरी हुई। नगर निगम ने पांच वर्ष पहले मच्छर मारने के लिए 10 फॉगिंग मशीन खरीदने के लिए 2 करोड़ रुपए का बजट रखा था। पांच बार टेंडर भी निकाला, लेकिन आज तक एक भी मशीन नहीं खरीदा। तीन कोल्ड वाटर माउंटेड फॉगिंग मशीन के सहारे फॉगिंग होती है, लेकिन यह सिर्फ वीआईपी क्षेत्रों तक सीमित है। साफ-सफाई और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को एक दशक में भी धरातल पर नहीं उतारा जा सका। वर्ष 2011 में एटूजेड कंपनी को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का ठेका दिया गया था, लेकिन वह फेल हो गई। पांच वर्ष पहले शहर में 1100 किमी लंबी नालियां थी, अब वह मात्र 1500 किमी हुई। इसी तरह पांच वर्ष पहले 1300 किमी लंबी सड़क थी, अब 1700 किमी हुई। पांच वर्ष पहले करीब 40 हजार स्ट्रीट लाइट थी, अब उसमें मात्र 2 हजार की बढ़ोत्तरी हुई। पांच वर्ष पहले भी 40 से 50 प्रतिशत घरों से कूड़े का उठाव हो रहा था आज भी मात्र 50 प्रतिशत घरों से कूड़े का उठाव हो रहा है। इसमें भी कोई सुधार नहीं हुआ।

ऐसे बढ़ा टैक्स का बोझ

एक हजार वर्गफीट में बने घर का 5 वर्ष पहले होल्डिंग टैक्स 700 रुपए था, अब 2100 रुपए हो गया। क्योंकि, वर्ष 2016 में होल्डिंग टैक्स की नई नियमावली लागू की गई। इसके बाद सभी घरों का 24 वर्ष बाद नए सिरे से असेस्मेंट हुआ। रोड की चौड़ाई के आधार पर टैक्स निर्धारित होने से एसबेस्टस के घर से लेकर पक्का मकान का टैक्स तीन गुणा तक बढ़ा। किराएदार रखने, दुकान, मोबाइल टावर लगाने पर होल्डिंग टैक्स डेढ़ से तीन गुणा टैक्स बढ़ा है।

5 वर्ष में सुविधाओं की रफ्तार

  • नाली- 1100 किमी लंबी नालियां पहले शहर में थीं, अब बढ़कर मात्र 1500 किमी हुई
  • सड़क- 1300 किमी लंबी सड़क थी, अब तक केवल 1700 किमी हुई
  • स्ट्रीट लाइट- पहले करीब 40 हजार स्ट्रीट लाइट थी, अब 2 हजार बढ़ी
  • कूड़े का उठाव- पहले भी 40 से 50 प्रतिशत घरों से कूड़ा उठता था, अभी भी 50 प्रतिशत ही है

150 से अधिक मुहल्लों में सड़क-नाली नहीं

  • सड़क-नाली- पांच वर्षों में मात्र 400 किमी सड़क और 400 किमी नाली की लंबाई बढ़ी। क्योंकि अधिकतर स्थानों पर सड़क के साथ आरसीसी नाली का निर्माण किया गया। शहर के 53 वार्डों में 150 से अधिक ऐसे मुहल्ले हैं जहां अभी तक सड़क और नाली नहीं बनी।
  • लाइट की रोशनी हुई कम स्ट्रीट- पांच वर्षों के दौरान नया लाइट नहीं लगा। पहले से लगे लाइट भी अब खराब हो रहे हैं। उसकी मरम्मत भी समय पर नहीं होती, जिससे मुहल्ले अंधेरे में हैं।
  • पानी पिलाने में भी पिछड़ा- इस वर्ष प्रत्येक वार्ड में पांच-पांच बोरवेल लगाने व 30 नया टैंकर खरीदने थे, लेकिन निगम ने एक भी टैंकर नहीं खरीदा। पाइपलाइन से मात्र 60% क्षेत्रों में ही जलापूर्ति होती है।

सरकार ने रोका विकास, फंड नहीं मिल रहा है

प्रॉपर्टी टैक्स से जो पैसा मिलता है, वह कर्मचारियों के वेतन, सफाई आदि पर ही खर्च हो जाता है। पिछले दो वर्षों से नाममात्र का फंड मिला। 15वें वित्त आयोग के फंड से रोड-नाली बनाने पर रोक लगा दी गई। आमदनी बढ़ने के बाद ही हरेक काम निगम कर पाएगा।

आशा लकड़ा, मेयर

Source : Dainik Nhaskar

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