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काबुल :7 दिन बाद मॉल-होटल और लोकल बाजार खुले तो शॉपिंग के लिए भीड़ लग गई, बस स्टॉप पर लोग आइसक्रीम खाते ‌दिखे

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ये कहानी है काबुल की, उसकी गलियों-चौबारों से। उसी के एक बाशिंदे की नजर से। इसलिए हमने इसे काबुलीवाले की कहानी कहा है, लेकिन कहने वाले का नाम नहीं बता सकते, उन्होंने ही मना किया है। हालात जो ऐसे हैं।

तालिबानी कब्जे के 7 दिन बाद, यानी 21 अगस्त को काबुल के बाजार खुलने लगे थे। शहर के मॉल, होटल, मीट-सब्जी-अनाज मंडियां, किराना स्टोर और शॉपिंग के लिए सबसे मशहूर गुलबार सेंटर भी, लेकिन सवाल एक ही था कि हालात कैसे हैं…

जवाब ढूंढते हम एक काबुलीवाले से मुखातिब हुए। वो काबुल में पत्रकारों के मददगार रहे हैं, पर जर्नलिस्ट नहीं हैं। हमने उनसे कहा कि आप काबुल घूमिए, जो भी नजर आए उसकी फोटो खींचिए, वीडियो बनाइए और वहां के हालात जस के तस वॉयस मैसेज कर दीजिए। वो राजी हो गए।

तीन दिन, यानी 21, 22 और 23 अगस्त को वो रोज काबुल में करीब 45 से 50 किमी का चक्कर लगाया करते और जो-जो देखते, भेजते जाते। हमने उस कच्चे माल से तीन रिपोर्ट बनाईं। आज पहली रिपोर्ट काबुल के बाजार, बैंक और स्कूल से…

बस स्टॉप के पास आइसक्रीम के ठेले घूम रहे हैं, खाने वाले भी आ रहे हैं
21 अगस्त, दिन शनिवार, दोपहर के करीब 12 बजे, जगह- काबुल का मलिक अजहर स्क्वॉयर। सात दिन बाद लोग घरों के बाहर दिख रहे हैं। सड़क पर रह-रह कर कार, मोटर साइकिल, साइकिल गुजर रही हैं। कुछ लोग पैदल आगे बढ़ रहे हैं। इनमें बच्चे और इक्का-दुक्का औरतें भी हैं। सड़क क‌िनारे आइसक्रीम वाले लौट आए हैं। खाने वाले भी।

सड़क के दोनों ओर नारियल पानी से लेकर टायर पंक्चर बनाने वाली दुकानें, नाश्ते वाले ठेले से लेकर आइस्क्रीम के ठेले तक नजर आ रहे हैं। दुकानों पर खरीदार भी खड़े हैं। कई दुकानों के बाहर प्रचार वाली स्टाइलिश महिला मॉडल्स की होर्डिंग्स लगी हुई हैं। इस स्टोरी में सबसे ऊपर लगे वीडियो में इन चीजों के वीडियो भी नजर आएंगे।

वीकेंड पर मॉल के फूड कोर्ट में खाने पहुंचे लोग
22 अगस्त, रविवार, दोपहर 3 बजे, जगह- काबुल का सबसे मशहूर मॉल गुलबार सेंटर। मॉल की 70% से ज्यादा दुकानें खुली हैं। ग्राउंड फ्लोर पर बने फूड कोर्ट में 25-30 लोग दिखाई दे रहे हैं। आधी से ज्यादा कुर्सियां खाली हैं। पहले शनिवार की शाम यहां बैठने की जगह नहीं होती थी, लेकिन अब 5-6 परिवार ही दिख रहे हैं।

ओपन मार्केट में भीड़ लगी है, दुकानदार चिल्ला-चिल्लाकर ग्राहक बुला रहे हैं
22 अगस्त, रविवार शाम करीब 5 बजे, काबुल का ओपन मार्केट। बाजार पहले की तरह ही भरा हुआ है। बाजार के बाहर कार खड़ी करने के लिए जगह ढूंढ़नी पड़ रही है।

ठेले, छोटे-स्टूल और नीचे दरी लगाकर जूते-चप्पल, बर्तन और मीट के दुकानदारों ने बाजार सजाया हुआ है। लोग उनमें से मनपसंद चीजें छांट रहे हैं। दुकानदार चिल्ला-चिल्लाकर ग्राहकों को बुला रहे हैं। कई दुकानदार हाथगाड़ी पर सामान लादे अभी आ रहे हैं। वो अगले दिन से अपनी दुकान सजाएंगे।बच्चे और बुर्कानशी महिलाएं दुकान से सामान खरीद रहीं हैं। हालांकि ये जरूर है कि पहले 100 दिखती थीं तो आज 3 या 4 ही दिख रही हैं।

बस स्टॉप पर दिनभर भीड़ लगी रही, बाजारों से घर लौटने के लिए
22 अगस्त की शाम 6 बजे, काबुल सिटी के मुख्य मिरवास मदान बस स्टॉप पर खड़े टैक्सी वाले लोगों को शहर के दूसरे स्टॉप पर ले जाने के लिए आवाज लगा रहे हैं। छोटे बच्चे यहां खलासीगिरी करते हैं। वो लोगों को पकड़-पकड़कर पूछ रहे हैं कि उन्हें कहां जाना है। एक टैक्सी वाले ने कहा कि बाजार खुलने के बाद से लगातार वहां भीड़ आ रही है। लोगों के हाथों में खरीदे हुए सामान हैं।

स्कूल, बैंक और मनी एक्सचेंज बंद रहे
हम 3 दिनों में इंटरनेशनल इंग्लिश लैंग्वेज इंस्टीट्यूट से लेकर शहर के अलग-अलग जगहों पर बने 9 स्कूलों पर पहुंचे, लेकिन इनमें से कोई भी खुला नहीं है। ये बात जुदा है कि कुछ रोज पहले तालिबानी हुकूमत ने बच्चियों की स्कूल जाते तस्वीर जारी की थी, लेकिन काबुल के जिस हिस्से की वो तस्वीर है, वहां भी अभी कोई स्कूल खुला नहीं मिला।

वेस्टर्न यूनियन, मनी ग्राम, एक्सप्रेस मनी के साथ काबुल के सारे बैंक बंद हैं। बैंक की रखवाली कर रहे शख्स से बात करने की कोशिश की। उन्होंने कहा- बैंक के कर्मचारी तो नहीं हां, आम लोग पूछने जरूर आते हैं कि बैंक कब खुलेंगे। हुकूमत ने ऐलान किया है कि बुधवार से बैंक खोले जाएंगे।

बिजनेसमैन्स ने कहा- हम दोहरी सत्ता के बीच में लटक रहे थे, तालिबान आने से खुश हैं
गुलबार सेंटर मॉल में परफ्यूम की दुकान के मालिक खुद काउंटर पर बैठे हैं। उनका कहना है कि देश में इस्लामिक हुकूमत के आने से उन्हें खुशी है। पिछली सरकार अमेरिका परस्त थी। बीते 2 साल तनाव वाले रहे। समझ नहीं आ रहा था कि किसकी सुनें। तालिबानी हुक्मरानों की या सरकार की। हम डरे रहते थे।

गुलबार सेंटर के ठीक सामने दाउदजई बिजनेस सेंटर है। इसमें कपड़े की दुकान वाले एक शख्स ने कहा कि करीब 5 सालों से काबुल के बिजनेसमैन बहुत परेशान रहे हैं। हम पर तालिबान और सरकार दोनों का दबाव रहता। कब-कौन हमें दुकान बंद करने का फरमान दे देगा, नहीं पता था। तालिबान आने से कम से कम अब एक ही सरकार को जवाब देना होगा।

Source : Dainik Bhaskar

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